DHFL ने किया देश का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड | DHFL बैंकिंग फ्रॉड क्या है ? |DHFL Banking Fraud

DHFL ने किया देश का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड | DHFL बैंकिंग फ्रॉड क्या है ? |DHFL Banking Fraud

नीरव मोदी पर 13000 करोड रुपए के घोटाले का आरोप है। विजय माल्या पर 17 बैंक को को 9000 करोड़ रुपए का चूना लगाने का आरोप है।

लेकिन अगर आपसे कोई पूछे कि देश में सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड किसने किया है तो इसका जवाब दीवान हाउसिंग फाइनेंस यानी DHFL दीजिएगा। दीवान हाउसिंग फाइनेंस ने देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले को अंजाम दिया है। यह मामला नीरव मोदी के बैंकिंग घोटाले से 3 गुना ज्यादा है इससे पहले ABG शिपयार्ड की 23000 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।

DHFL Banking Fraud क्या है ?

डीएचएफएल बैंक घोटाला इससे भी ज्यादा बढ़ा है। डीएचएफएल पर 33615 करोड रुपए की बैंकिंग धोखाधड़ी का आरोप है। यह कर्ज 17 बैंकों के कंसोर्सियम से लिया गया। इस कंसोर्सियम की सुनवाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया कर रहा था। इस घोटाले की शिकायत सीबीआई को 11 फरवरी 2022 को दी गई। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की और अब एक्शन शुरू कर दिया गया है सीबीआई ने मुंबई में इस मामले में डीएचएफएल के ऑफिस और प्रमोटर्स के 12 ठिकानों पर छापेमारी की है। सीबीआई ने इस मामले में डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वादभान और धीरज वादभान को आरोपी बनाया है।

इसके अलावा Skylark Buildcon Private Limited, Darshan Developers Private Limited, Sigtia Constructions, Township Developers, Shishir Reality, Sunblink Real Estate, इन सबके साथ सुधाकर शेट्टी को भी आरोपी बनाया गया है।

DHFL Banking Fraud
DHFL Banking Fraud

डीएचएफएल और उनके प्रमोटर कपिल वाधवान और धीरज वाधवान पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर इस बैंकिंग घोटाले की साजिश की है। कपिल वाधवान और धीरज वाधवान बैंकों के कंसोर्सियम को 34600 करोड़ का कर्ज देने के लिए प्रेरित किया। इस कर्ज के बड़े हिस्से का डीएचएफएल ने खाते और बैलेंस शीट मैं गड़बड़ी करके दुरुपयोग भी किया।

यानी जिस काम के लिए कर्ज लिया गया उसका इस्तेमाल वहां ना करके दूसरी कंपनी के लिए या प्राइवेट प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया गया। डीएचएफएल एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है कपिल वाधवान के चेयरमैन थे, डीएचएफएल अब डूबने की कगार पर है और इसको बेचने की प्रक्रिया चल रही है।

सीबीआई को इस मामले की शिकायत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने की है इस मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के ऑडिट फर्म KPMG की जांच रिपोर्ट को भी रखा गया है। KPMG ने अपनी ऑडिट में पाया कि डीएचएफएल ने अपने खातों में हेराफेरी की है, जानकारियों को छुपाया है, बैंक को गलत जानकारी दी है, अघोषित खातों को छुपाया है और बैंकिंग प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।

कुल मिलाकर डीएचएफएल ने 34,600 करोड का कर्ज़ बैंकों की आंखों में धूल झोंक कर हासिल किया है। साल 2019 में पूरे कर्ज को NPA घोषित किया गया। इसके बड़े कर्ज देने की वजह से देश के 17 बैंकों को 40000 करोड़ से ज्यादा की चपत लगी है। डीएचएफएल वाले वाधवान बंधुओं पर धोखाधड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी 5000 करोड़ के यस बैंक घोटाले में वाधवान बंधुओं का नाम आया था। इस मामले में कपिल वाधवान और धीरज वाधवान को 2020 में ED ने गिरफ्तार भी किया था।

देश में सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला होने के बाद देश के बैंकिंग सिस्टम को फिर से सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। बैंक आम आदमी को लोन देने से पहले कागजी कार्रवाई के नाम पर तो दौड़ाते हैं लेकिन घोटाले बाजों को जनता का पैसा आंख बंद करके बांट देते हैं। यह वही बैंक है जिनके अफसर ईमानदार मिडिल क्लास को लोन देते वक्त तो पूरी सतर्कता बरतते हैं लेकिन डीएचएफएल और ABG शिपयार्ड जैसी कंपनियों को कर्ज बांटते वक्त सारी एतिहाद भूल जाते हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि चाहे नीरव मोदी हो या फिर विजय माल्या और अब डीएचएफएल जैसी कंपनियां बैंकों को चूना लगाने वालों का सिर्फ चेहरा बदलता है लेकिन तरीका वही रहता है।

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