1) Co-Payment

•इसमे आपका जितने का बिल आता है उसका कुछ % आपको देना होगा । •जेसे अगर आपका 2 लाख का बिल आया तो उसका 20% आपको देना होगा । •जो 2 लाख का 20,000 रुपए होता है । •इसीलिए ऐसा प्लान लें जिसमे Co-Payment न हो या फिर कम हो ।

2) Room rent capping

•इसका मतलब होता है रूम के रेंट पर लिमिट लगा देना। बोहोत सी पॉलिसी में रूम के रेंट के लिए sum assured का 1% ही मिलता है। •जैसे अगर आपका 5 लाख रुपए का बीमा है तो उसका 1% आपको कमरे के किराए के लिए मिलेगा। •यानी की 5 लाख का 1% जोकि होता है 5,000 रुपए। •आपको इसके लिए अपने आस पास के 3-4 हॉस्पिटल का किराया पता होना जरूरी है या आप इंटरनेट से भी पता कर सकते है। •कोई – कोई कंपनी अपने कुछ पॉलिसी में Room Rent Capping नहीं रखती, फिर चाहे आपका रूम कितने का भी हो।

3) ICU Charges and Doctor Fees

•आपको पॉलिसी में ये जरूर चेक कए लेना है की उसमे ICU चार्ज या डॉक्टर की फीस इंक्लुड होती है की नहीं। •आपको यह भी देख लेना है की इसमे Tests, Drugs & Medicines कवर है की नहीं। •Consumables – दोस्तो आज कल बीमा कंपनी PPE KIT, Hand Gloves, Sanitizer ये सब चीजे जो डॉक्टर द्वारा आपके इलाज में इस्तेमाल की जाती है उसका पैसा कोंपनय नहीं देती। ये बेनिफ़िट हमे पॉलिसी में अदद करवाना पड़ता है नहीं तो हर बस 2-4 हज़ार अपनी जेब से देने पड़ते है। इसलिए जब भी आप पॉलिसी लें तो इसको जरूरु लें।

4) Sub-Limits In Specific Diseases

•Companies कुछ बीमारी और इलाज पर लिमिट लगा के रखती है बिलकुल रूम रेंट की तरह। कुछ बीमारियों के इलाज पर कंपनी पूरे पैसे नहीं देती •अगर आपको कोई बड़ी बीमारी है जैसे कैंसर, तो उसमे कंपनी कहती है की इसमे हम आपको पूरे पैसे नहीं दे पाएंगे इसमे companies कुछ पैसे कम देती है। •जैसे डेलीवेरी में कुछ companies 30,000/- डेलीवेरी देती है चाहे फिर आपके 50,000 क्यों न लग जाए।

5) Waiting Period

•Waiting Period का सिम्पल सा मतलब है की कंपनी आपको बताती है की इस बीमारी का इलाज आप अभी नहीं बल्कि कुछ महीने या कुछ साल बाद ही करवा सकते है। अगर कोई बीमारी पहले से है तो उसमे 2-2 साल तक का भी वेटिंग पीरियड दिया जाता है। उन बीमारियो को हम Pre – Existing Diseases बोलते है। इसमे ज़्यादातर बड़ी बीमारियाँ ही होती है। जैसे- दिल में छेद, Heart Blockage, थ्यरोइड। •लेकिन नॉर्मल बीमारी तो 1 महीने बाद से ही कवर हो जाती है , जेसे मान लो अगर किसी को insurance लेने के बाद पथरी हो गई या पीलिया हो गया तो उसका इलाज वो 1 महीने बाद भी करवा सकता है। •हर कंपनी में अलग अलग बीमारी के लिए अलग अलग टाइम होता है। इसलिए आप अपने एजेंट से सारी बाते पहले पूछ लें। •अगर बात करे एक्सिडेंट की तो उसका कवर तो हर कंपनी में पहले दिन से ही चालू हो जाता है।

6) Pre and Post Hospitalization

•इस benefit में जब भी आप हॉस्पिटल में एड्मिट होते है तो उस से 60 दिन पहले के खर्चे और 90 दिन बाद तक के खर्चे इसमे कवर किए जाते है । •जेसा की हम सबको पीटीए है की हॉस्पिटल से discharge होने के बाद भी हमारी दवाइयाँ चलती रहती है और कभी कभी डॉक्टर भी हमे चेक-उप के लिए बुलाते है जिसमे उनकी फीस भी लगती है। •ये जो 60 दिन और 90 दिन का टाइम है ये हर पॉलिसी में अलग भी हो सकते है किसी में जादा भी हो सकते है और किसी में कम। •आपको इसका इतना लालच नहीं करना हो सकता है की कंपनी आपको ये जादा देदे और किसी और चीज में आपको काट लें। आखिर कंपनी का भी मेन मकसद तो पैसा कमाना ही है न ।

7) Health Check-up

•पॉलिसी लेते समय आपको हैल्थ check-up की लिमिट के बारे में भी पीटीए करना है । इसका मतलब है की आप साल में एक बार अपना नॉर्मल health checkup करवा सकते है । •लेकिन इसमे भी लिमिट होती है, जैसे कंपनी केवल आपको health चेक-उप के लिए आपके sum assured का 1% ही देती है •जैसे अगर आपने 5 लाख का बीमा यानि insurance लिया है तो उसका 1% जोकि 5,000 होता है। इतने रुपए तक का ही आप हैल्थ check – up करवा सकते है। •ये 5,000 भी एक जने के लिए नहीं है, बल्कि सबके लिए है, मान लो आपने 3 लोगो का इन्शुरेंस लीआ है जिसमे आप, आपकी वाइफ़, और आपकी बेटी है तो आप तीनों का मिलाके 5,000 रुपए कंपनी देगी, न की 5,000 एक जने के लिए जो की 15,000 होते है। •कुछ पॉलिसी में ऐसा होता है की अगर हमने किसी साल Claim नहीं लीआ तो ही हम Check-up करवा सकते है। •हम ऐसे फॅमिली प्लान को Family Floater Plan बोलते है जिसमे आप अपने साथ साथ अपने परिवार का भी बीमा कराते है। •

8) Day Care Treatments

•इसका मतलब होता है वो Operations जिनमे Technology की वजह से टाइम कम लगता है और Patient को 24 घंटे हॉस्पिटल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं है। •आप ऐसे treatment की लिस्ट policy में देख सकते है की ऐसे कौन-कौन से treatment है जिसमे 1 दिन भी एड्मिट नहीं रहना होता और उसका Claim मिलता है की नहीं क्यूंकी जरूरी नहीं सारे ही Short Treatment इसमे कवर ही हो।

9) Automatic Restoration

•इसका मतलब है अगर आपने 5 लाख लाख का बीमा लिया और आपके इलाज में पूरे 5 लाख रुपए खर्च हो गए तो अब आपके पास कुछ नहीं बचा। •और मान लो 2 महीने बाद आपको फिर admit होना पड़ा तो आप क्या करोगे ? •ऐसे में कंपनी आपका Insurance Restore कर देती है। मतलब अब आप फिर से उसी साल 5 लाख रुपए तक का इलाज करवा सकते हो। लेकिन आपकी पॉलिसी में यह है की नहीं आपको ये पहले पता करना होगा और इस बेनिफ़िट को होने की वजह से premium भी थोड़ा सा बढ़ जाता है। लेकिन वो इतनी बड़ी बात नहीं है, क्यूंकी जहां 5 लाख का फायदा हो रहा हो वह 2-3 हज़ार रुपए नहीं देखे जाते। •दूसरी बार 5 लाख खर्च करने के बाद आपको तीसरी बार 5 लाख नहीं मिलेंगे। नहीं तो ऐसे कंपनी लूट जाएगी। •आपको इसमे एक बात और देखनी है की जिस साल आप डबल क्लैम ले लेते तो क्या उसके अगले साल आपको डबल क्लैम मिलेगा या नहीं और नहीं तो क्या उसके अगले साल मिलेगा ?

10) Policy Renewal

कई बार देखा जाता है की 60 साल का होने के बाद कंपनी insurance को renew करने से मना कर देती है। तो आपको यह जरूर से देख लेना है की पॉलिसी में Lifetime Renewal है की नहीं। क्यूंकी इंसान को इलाज की जरूरत बुढ़ापे में ही ज्यादा होती है।