पुलिस और वकील में कौन ज्यादा पावरफल होता है ? | Who is More Powerful Police Or Lawyer ?

पुलिस और वकील में कौन ज्यादा पावरफल होता है ? | Who is More Powerful Police Or Lawyer ?

वैसे तो हमारे देश के अंदर सबसे ज्यादा ताकतवर है कानून क्योंकि कानून की कड़ी हमारे देश के संविधान से जुड़ी हुई है। यानी देश में कानून सबसे सर्वप्रिय है। और अगर बात आती है कानून की तो वकील कानून का ज्ञाता कहलाया जाता है। वकील एक विद्वान होता है और कानून का जानकार होता है। और अगर दूसरे शब्दों में समझें तो इसी को हम वकील की पावर कहेंगे कि वह कानून का जानकार है।

अगर जज का कोई मैटर है तो वह भी वकील के पास जाएगा, पुलिस का कोई मैटर है तो वह भी वकील के पास जाएगा, कलेक्टर का कोई मैटर है तो वह भी वकील के पास जाएगा, एसडीएम का कोई मैटर है तो वह भी वकील के पास ही जाएगा और यदि वकील का खुद का कोई मैटर है तो वह भी वकील के पास ही यानी कि खुद के पास ही आएगा। और अगर हम ऐसे नजरिए से देखते हैं तो हमें लगता है कि वकील ही ज्यादा पावरफुल है।

लेकिन अगर हम दूसरे नजरिए से देखने की कोशिश करें क्योंकि वकील जो है एक तरीके से कोट पर निर्भर है क्योंकि वह कोर्ट के द्वारा ही कार्रवाई कर सकता है। वकील को कोर्ट के प्रोसिडिंग के अनुसार ही काम करना पड़ेगा।

पुलिस की कितनी पावर होती है ?

अब बात आती है पुलिस की। तो पुलिस कहीं ना कहीं आत्मनिर्भर है, पुलिस के पास एक खास अधिकार है।जैसे अगर पुलिस के पास कोई कंप्लेंट लेकर आता है चाहे वह कोई आम इंसान हो या फिर वह कोई वकील हो। तो पुलिस के पास यह पावर है कि वह उस मामले की जांच कर सकती है, इनिशियल इंक्वायरी कर सकती है, मतलब किसी भी व्यक्ति को बुलाकर पूछताछ कर सकती है या किसी व्यक्ति के पास खुद भी जा सकती है। तो यह जो पावर है वह केवल पुलिस के पास है और इसके अंदर पुलिस को किसी से किसी भी प्रकार की परमिशन लेने की जरूरत नहीं है।

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अगर कॉग्निजेबल ऑफेंस है यानी बहुत ही सीरियस मामला है तो उसके अंदर पुलिस को किसी की भी परमिशन लिए बिना वह उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है जिसने वह जुर्म किया है। यानी अगर पुलिस को लगता है की किसी XYZ इंसान ने यह कॉग्निजेबल ऑफेंस किया है तो वह उसे सीआरपीसी की धारा 41 के तहत बिना किसी वारंट के भी अरैस्ट कर सकती है। चाहे वह अपराध किसी जज ने किया हो, किसी वकील ने किया हो या किसी पुलिस वाले ने ही किया हो।

उदाहरण के लिए जैसे अलवर में एक पुलिस वाले पर एक लड़की ने 3 दिन तक रेप करने का आरोप लगाया वह भी पुलिस कंपाउंड के अंदर। उस पुलिस वाले को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। तो पुलिस का यह जो पावर है यह एक स्ट्रांग पावर है।

तो अब आप को ऐसा लग रहा होगा कि पुलिस ज्यादा पावरफुल है। लेकिन दोस्तों पुलिस की जो यह पावर है यह बाउंड है की वह इन पावर का इस्तेमाल तभी करेंगे जब अपराधी ने कॉग्निजेबल ऑफेंस किया हो यानी सीरियस क्राइम किया हो। पुलिस कोई भी रूटीन इन्वेस्टिगेशन के लिए ऐसे किसी को भी बिना वारंट के रेस्ट नहीं कर सकती। वह केवल इन पावर का इस्तेमाल तभी कर सकती है जब कानून की धारा किए गए अपराध पर लगती हो।

पुलिस की दूसरी पावर की बात करें तो वह 151 सीआरपीसी में दी गई है जिसके तहत पुलिस किसी को शक यानी आशंका के आधार पर भी गिरफ्तार कर सकती है। इस धारा का इस्तेमाल कॉग्निजेबल ऑफेंस यानी सीरियस क्राइम होने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा किया जाता है। यानी अपराध होने से पहले यदि पुलिस को लगता है कि यह व्यक्ति सीरियस क्राइम कर सकता है तो वह उसे आशंका के आधार पर उस व्यक्ति को बिना वारंट के भी अरैस्ट कर सकती है।

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आप सभी को इसकी जानकारी भी होगी कि जैसे यदि कोई 2 व्यक्ति मोहल्ले के अंदर गाली गलौज करते हैं तो पुलिस उन्हें भी गिरफ्तार कर लेती है, या कोई घरेलू विवाद है आपस का या कोई नाली का विवाद है, या कोई हस्बैंड वाइफ का विवाद है तो उसमें भी पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। क्योंकि पुलिस को ऐसी आशंका होती है कि यह व्यक्ति कॉग्निजेबल ऑफेंस कर सकता है और इसी ओफफेंस को रोकने के लिए पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है। तो अगर आप यह पावर देखते हैं तो पुलिस का पलड़ा भारी नजर आता है।

वकील की पावर ?

लेकिन दोस्तों अगर देखा जाए तो यह तुलना ही गलत है। क्योंकि जब बात आती है पावर की तो कोर्ट के अंदर शुरू होती है वकील की पावर और पुलिस की पावर कोर्ट से बाहर है। तो यह दोनों अलग-अलग मामले हो गए, इसमें हम तुलना बिल्कुल भी नहीं कर सकते। क्योंकि पुलिस जब कोर्ट में जाती है तो वह जज के सामने चार्जशीट फाइल कर देती है और उसके बाद पुलिस का खेल खत्म हो जाता है। पुलिस आएगी और वकील के और कोर्ट के सवालों का जवाब देगी क्योंकि जो वह चार्जशीट तैयार करवा कर लाई है उसके अंदर खुद पुलिस भी गवा बन जाती है।

तो हम यह कह सकते हैं कि कोर्ट के बाहर पुलिस पावरफुल है और कोर्ट के अंदर वकीलों की पावर शुरू हो जाती है।

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